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बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार का मामला : विधायक और पूर्व विधायक के पत्रों पर भी अधिकारी नहीं दे रहे हैं गंभीरता से ध्यान

19-05-2024 02:31 PM
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रायपुर 

BIG BREAKING


अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकरण निधि से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2020-21में मार्ग निर्माण व उन्नयन के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा स्वीकृत किए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने की शिकायत अब सामने आने लगी है । सत्ता संरक्षण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर उसी समय से आवाज उठने लगी थी पर कांग्रेस की सरकार और कांग्रेस के मंत्री विधायक होने के कारंण आगे आकर शिकायत करने की लिखित शिकायत कर मांग करने की जहमत किसी ने नहीं उठाया परन्तु विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा बनकर उभरा और चुनाव को प्रभावित किया ।

केशकाल विधानसभा क्षेत्र में तो विधानसभा चुनाव में यह मुरूम घोटाला के नाम से जोर शोर से उठा और कांग्रेस को मिलने वाले वोट को प्रभावित भी किया ।

  चुनाव संपन्न होकर ग्रामींण और भाजपा के कार्यकर्ता अपने नवनिर्वाचित विधायक नीलकंठ टेकाम से मुरूम घोटाला की जांच कराने की मांग उठाने लगे ।

जिस पर पूर्व आई. ए .एस. अफसर और जिला के कलेक्टर रह चुके विधायक नीलकंठ टेकाम ने जनभावना का ख्याल रखते 19जनवरी 2024को बस्तर कमिश्नर श्याम धावडे को पत्र क्रमांक 81/निवास /केशकाल/ MLA/2024 लिखकर विकास खंड बड़े राजपुर अंर्तगत 10ग्राम पंचायतों में मुरमीकरंण कार्य की जांच कराने विषयक पत्र प्रेषित कर टीम बनाकर जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की मांग किया।उक्त पत्र की प्रतिलिपि सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय छ.ग.शासन, मुख्य सचिव छ.ग.शासन , कलेक्टर जिला कोंडागांव , मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोंडागांव तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बड़े राजपुर को प्रेषित किया था । परंतु पत्र पर जांच कार्रवाई न होने पर पुनः 01-05-2024को श्रीश्याम धावडे आयुक्त बस्तर संभाग जगदलपुर को दिनांक 11-05-2024को स्मरंण पत्र प्रेषित कर मुख्यमंत्री के सचिव , मुख्य सचिव, कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी प्रतिलिपि प्रेषित किया है ।

  उल्लेखनीय है कि अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से द्वितीय श्रेणी मार्ग का निर्माण करने बड़े राजपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत -हरवेल,कोरगांव,कोसमी, किवडा,बालेंगा,कलगांव ,बाड़ा गांव,कौंदकेरा, पलना , छिंदली के नाम से कुल 106256000/दस करोड़ बैसंठ लाख छप्पन हजार रूपया स्वीकृत किया गया था ।

जानकारों का कहना है कि मात्र खानापूर्ति करने के लिए जे.सी.बी.से मुरूम खुदाई और ट्रैक्टर में लोडिंग करवाकर गांव के गलियों में डाल दिया गया । जिस पर न पानी डाला गया न रोलर चलाया गया न पेंच निर्माण किया गया पर संबंधितों द्वारा एक राय होकर कूटरचित बिल व्हाउचर मस्टररोल बनाकर स्वीकृत धनराशि में जमकर बंदरबांट कर लिया गया । 

अघोषित जगह से किए गये मुरूम उत्खनन परिवहन का रायल्टी भी खनिज विभाग को अदा नहीं किया गया । मार्ग निर्माण उन्नयन के नाम से स्वीकृत धनराशि के गबन घोटाला में संबंधित तकनीकी सहायक सब इंजीनियर ने और सचिव सरपंच ने बहुत अहं भूमिका अदा किया था।

 गबन घोटाला से जुड़े लोगों के खाते में हुआ करोड़ों का लेन-देन


द्वितीय श्रेणी मार्ग निर्माण व उन्नयन के नाम से शासन द्वारा स्वीकृत धनराशि में गड़बड़झाला करने में संलिप्त लोगों के व उनके पत्नी व परिवार के नाम के खातों में चंद दिनों में लाखों लाखों का संदिग्ध लेन देन हुआ जिसमें से दो खातों की जांच की मांग केंद्र सरकार राज्य सरकार के वित्त मंत्री से लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.), आयकर विभाग , भारतीय स्टेट बैंक को केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव द्वारा भेजा गया वहीं आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ई.ओ.डब्लू )के महानिदेशक से किया गया है पर अभी तक कहीं से भी किसी स्तर पर जांच आरंभ नहीं हो पाया है । 

सत्ता परिवर्तन तो हो गया पर व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हो पाया ---


छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस की सरकार की जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार बना दिया फलस्वरूप सत्ता परिवर्तन हो गया पर व्यवस्था में परिवर्तन अभी तक नहीं हो पाया । अधिकारी आज भी पुराने ही ढर्रे पर नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली चाल पर चल रहे हैं ।

सत्तासीन सरकार के विधायक और वो भी आई.ए.एस.अधिकारी तथा कलेक्टर रह चुके विधायक के पत्र पर पांच पांच महिने तक अधिकारियों द्वारा ध्यान न दिये जाने पर पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि - जब वर्तमान विधायक के पत्र पर अधिकारी ध्यान नहीं देते तो पूर्व विधायक और आम पब्लिक के समस्या शिकायत आवेदन पर अधिकारी कितनी गंभीरता एवं संवेदनशीलता से ध्यान देंगे यह अंदाजा लगाया जा सकता है ।

  प्रदेश के सहज सरल मुख्यमंत्री

विष्णु देव साय के द्वारा प्रदेश में " सुराज "स्थापना के संकल्प को साकार करने के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर आम जनता के आवेदन शिकायत पर समयावधि में जांच कार्रवाई पूर्ण करने की व्यवस्था किया जाना प्रथम आवश्यकता होगी अन्यथा जिस ढर्रे पर बाबू से लेकर साहब तक काम करते आ रहे हैं उससे " सुराज " की कल्पना धरा का धरा रह जायेगा ।

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